हृदय गति रुकने से हुआ निधन, पूरे गांव में शोक की लहर
10 नवंबर।
जलमाना क्षेत्र के गांव चोरकारसा के एक युवक की अमेरिका में हृदय गति रुकने से मौत हो गई। युवक की असमय मृत्यु की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों के चेहरों पर गहरा दुख देखा जा रहा है और हर कोई उसकी मिलनसार और मेहनती छवि की चर्चा कर रहा है।
जानकारी देते हुए पूर्व ब्लॉक समिति सदस्य नरेश कुमार गोगी ने कहा कि यह खबर किसी को भी विश्वास करने योग्य नहीं लग रही। कैसे एक हृष्ट-पुष्ट और स्वस्थ व्यक्ति की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो सकती है, यह समझ से परे है, उन्होंने कहा कि मृतक बलजीत सिंह उर्फ काला बेहद होनहार और सभी का चहेता था। उन्होंने चिंता जताई कि अमेरिका से डिपोर्ट हो रहे युवाओं का भविष्य लगातार खतरे में है। मास्टर संदीप ने बताया कि चार वर्ष पहले बलजीत अमरीका गया था। जिसके पीछे उनकी पत्नी दो बच्चे पुत्र वंश 17 वर्ष, पुत्री वंशिका 15 वर्ष को छोड़ गया है। पिता भाग सिंह है माता पहले गुजर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमारे युवा अपनी जमीनें बेचकर और घर गिरवी रखकर रोजगार की तलाश में विदेश जा रहे हैं, पर वहां उन्हें असुरक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें डिपोर्ट भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काला की मौत की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोग उसके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। अब परिजनों के सामने शव को भारत लाने की चिंता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
फोटो कैप्शन: स्वजनों द्वारा दी गई मृतक की फोटो।
जलमाना क्षेत्र के गांव चोरकारसा के एक युवक की अमेरिका में हृदय गति रुकने से मौत हो गई। युवक की असमय मृत्यु की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों के चेहरों पर गहरा दुख देखा जा रहा है और हर कोई उसकी मिलनसार और मेहनती छवि की चर्चा कर रहा है।जानकारी देते हुए पूर्व ब्लॉक समिति सदस्य नरेश कुमार गोगी ने कहा कि यह खबर किसी को भी विश्वास करने योग्य नहीं लग रही। कैसे एक हृष्ट-पुष्ट और स्वस्थ व्यक्ति की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो सकती है, यह समझ से परे है, उन्होंने कहा कि मृतक बलजीत सिंह उर्फ काला बेहद होनहार और सभी का चहेता था। उन्होंने चिंता जताई कि अमेरिका से डिपोर्ट हो रहे युवाओं का भविष्य लगातार खतरे में है। मास्टर संदीप ने बताया कि चार वर्ष पहले बलजीत अमरीका गया था। जिसके पीछे उनकी पत्नी दो बच्चे पुत्र वंश 17 वर्ष, पुत्री वंशिका 15 वर्ष को छोड़ गया है। पिता भाग सिंह है माता पहले गुजर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमारे युवा अपनी जमीनें बेचकर और घर गिरवी रखकर रोजगार की तलाश में विदेश जा रहे हैं, पर वहां उन्हें असुरक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें डिपोर्ट भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काला की मौत की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोग उसके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। अब परिजनों के सामने शव को भारत लाने की चिंता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।फोटो कैप्शन: स्वजनों द्वारा दी गई मृतक की फोटो।


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